तेरी नज़र…

वह रूप था या रंग था हर पल जो मेरे संग था

मैंने कहा कौन है उसने कहा तेरी नज़र

 

 

– aamir khusaro

ख्वाब

चंद रातों के ख्वाब

उम्र भर की नींद मांगते है !

 

 

-gulzar

चांद से फूल से या मेरी ज़ुबाँ से सुनिए

चांद से फूल से या मेरी ज़ुबाँ से सुनिए
हर जगह आपका क़िस्सा हैं जहाँ से सुनिए

सबको आता नहीं दुनिया को सजाकर जीना
ज़िन्दगी क्या है मुहब्बत की ज़बां से सुनिए

क्या ज़रूरी है कि हर पर्दा उठाया जाए
मेरे हालात भी अपने ही मकाँ से सुनिए

मेरी आवाज़ ही पर्दा है मेरे चेहरे का
मैं हूँ ख़ामोश जहाँ , मुझको वहाँ से सुनिए

कौन पढ़ सकता हैं पानी पे लिखी तहरीरें
किसने क्या लिक्ख़ा हैं ये आब-ए-रवाँ से सुनिए

चांद में कैसे हुई क़ैद किसी घर की ख़ुशी
ये कहानी किसी मस्ज़िद की अज़ाँ से सुनिए

 

-nida fazli

 

अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफर के हम है

अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफर के हम है
रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं

पहले हर चीज़ थी अपनी मगर अब लगता है
अपने ही घर में किसी दूसरे घर के हम हैं

वक़्त के साथ है मिट्टी का सफर सदियों से
किसको मालूम कहाँ के है किधर के हम हैं

चलते रहते हैं कि चलना है मुसाफिर का नसीब
सोचते रहते हैं किस राहगुजर के हम हैं

-nida fazli

कभी कभी यूँ भी हमने अपने जी को बहलाया है

जिन बातों को ख़ुद नहीं समझें औरों को समझायां है !

-nida fazli

आदमी

हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी
फिर भी तनहाइयों का शिकार आदमी

सुबह से शाम तक बोझ ढोता हुआ
अपनी ही लाश का खुद मज़ार आदमी

हर तरफ भागते दौड़ते रास्ते
हर तरफ आदमी का शिकार आदमी

रोज जीता हुआ रोज मरता हुआ
हर नए दिन नया इंतज़ार आदमी

ज़िन्दगी का मुक़द्दर सफ़र दर सफ़र
आखिरी सांस तक बेक़रार आदमी

 

-nida fazli

ज़िन्दगी

क्या पता कब कहाँ से मारेगी,

बस की मैं ज़िन्दगी से डरता हु…

 

मौत का क्या है, एक बार मारेगी !

 

-gulzar