ख़ुदा

सामने है जो उसे लोग बुरा कहते हैं !
जिसको देखा ही नहीं उसको ख़ुदा कहते हैं !!

-sudarshan faakir

आज के दौर में ऐ दोस्त ये मंज़र क्यूँ है ..

आज के दौर में ऐ दोस्त ये मंज़र क्यूँ है,
ज़ख़्म हर सर पे हर इक हाथ में पत्थर क्यूँ है !!

जब हक़ीक़त है के हर ज़र्रे में तू रहता है,
फिर ज़मीं पर कहीं मस्जिद कहीं मंदिर क्यूँ है !!

अपना अंजाम तो मालूम है सब को फिर भी,
अपनी नज़रों में हर इन्सान सिकंदर क्यूँ है !!

ज़िन्दगी जीने के क़ाबिल ही नहीं अब “फ़ाकिर”,
वर्ना हर आँख में अश्कों का समंदर क्यूँ है !!

 

-sudarshan faakir

मौला

फिर मूरत से बाहर आकर चारों ओर बिखर जा !

फिर मंदिर को कोई मीरा दिवानी दे मौला !!

 

-nida fazli

बग़ावत

बिकता है तू मस्ज़िद मंदिर में, ये देख मुझे डर लगता है !

माशूक़ है तू जिनके दिल का, उन्हें न बग़ावत हो जाए !!

-anonymous

जुस्तुजू

जुस्तुजू जिस की थी उसको तो न पाया हमने !

इसी बहाने से मगर देख ली दुनिया हमने !!

-shaharyar

दुश्मनी

दुश्मनी लाख सही, ख़त्म न कीजे रिश्ता !

दिल मिले या न मिले, हाथ मिलते रहिये !!

 

– nida fazli

डाकिया…

सीधा साधा डाकिया, जादू करे महान!

एक ही थैले में भरे आसूं और मुस्कान!!

 

– nida fazli