कभी कभी यूँ भी हमने अपने जी को बहलाया है

जिन बातों को ख़ुद नहीं समझें औरों को समझायां है !

-nida fazli

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दुश्मनी

दुश्मनी लाख सही, ख़त्म न कीजे रिश्ता !

दिल मिले या न मिले, हाथ मिलते रहिये !!

 

– nida fazli

डाकिया…

सीधा साधा डाकिया, जादू करे महान!

एक ही थैले में भरे आसूं और मुस्कान!!

 

– nida fazli

इंसान

कोई हिन्दू कोई मुसलमाँ कोई ईसाई है,

सब ने इन्साँ न बनने की कसम खाई है !!

 

-nida fazli